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*बुझी सीरीज में फिर जली रोशनी, विद्यार्थियों के भीतर जगा आत्मनिर्भरता का विश्वास**वयम् गुरुकुलम में विद्यार्थियों ने सीखी दीपावली सीरीज की रिपेयरिंग और निर्माण की कला*

राजेंद्र राठौर

झाबुआ। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा देशभर में आयोजित *“शिक्षा से आत्मनिर्भरता सप्ताह” (25 सितंबर से 2 अक्टूबर)* के अंतर्गत वयम् गुरुकुलम, झाबुआ में विद्यार्थियों के लिए एक अनूठी एवं प्रेरणादायी कौशल-आधारित गतिविधि आयोजित की गई। इस गतिविधि में विद्यार्थियों ने अपने हाथों से खराब हो चुकी दीपावली की इलेक्ट्रिक सीरीज को ठीक करना तथा नई सीरीज तैयार करना सीखा।
विद्यालय प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों से आग्रह किया गया था कि वे अपने घरों में रखी ऐसी पुरानी दीपावली सीरीज लेकर आएँ, जो खराब होने के कारण उपयोग में नहीं आ रही हैं। विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में ऐसी सीरीज विद्यालय लाकर *“फेंकने की बजाय सुधारने”* की सोच के साथ इस गतिविधि में भाग लिया।
प्रशिक्षक पवनेंद्र सिसोदिया के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने सीरीज के विभिन्न हिस्सों को समझा, खराबी की पहचान की, तारों एवं कनेक्शन की जाँच करना सीखा और आवश्यक सुधार किए। विद्यार्थियों ने नई सीरीज बनाने की प्रक्रिया को भी व्यावहारिक रूप से समझा।

यह गतिविधि केवल तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि विद्यार्थियों में समस्या-समाधान, धैर्य, सूक्ष्म निरीक्षण, हाथों के कौशल और आत्मविश्वास को विकसित करने का जीवंत माध्यम बनी। जब विद्यार्थियों द्वारा ठीक की गई खराब सीरीज दोबारा जगमगाई, तो बच्चों के चेहरे खुशी और उत्साह से खिल उठे। उनके लिए वह जलती हुई सीरीज केवल रोशनी नहीं, बल्कि “मैं स्वयं कर सकता हूँ” के विश्वास की रोशनी थी।

इस अवसर पर विद्यालय के संचालक एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास में “शिक्षा से आत्मनिर्भरता” विषय के राष्ट्रीय संयोजक  ओमप्रकाश शर्मा ने  कहा—

“आत्मनिर्भरता केवल एक विचार या नारा नहीं, बल्कि एक जीवन-पद्धति है। इसे बचपन से ही व्यवहार और संस्कार का हिस्सा बनाना आवश्यक है। आज हमारे विद्यार्थियों ने अपने हाथों से खराब सीरीज को ठीक कर केवल तार और बल्ब नहीं जोड़े, बल्कि अपने भीतर आत्मविश्वास, धैर्य और सृजनशीलता की नई रोशनी जगाई है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य यही है कि विद्यार्थी केवल जानें नहीं, बल्कि सीखें, करें और अपने कौशल के माध्यम से समस्याओं का समाधान स्वयं कर सकें।”

श्री शर्मा ने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों में स्वदेशी सोच, वस्तुओं के पुनः उपयोग, संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करती हैं। किसी वस्तु के खराब होने पर उसे तुरंत फेंकने के बजाय उसकी मरम्मत कर पुनः उपयोग में लाने की आदत विद्यार्थियों को व्यावहारिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित करती है।

उल्लेखनीय है कि शिक्षा से आत्मनिर्भरता सप्ताह के अंतर्गत वयम् गुरुकुलम में विद्यार्थियों के लिए विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इनमें स्वच्छता अभियान, पौधारोपण, सेवा कार्य, वंदे मातरम् गीत का सामूहिक अभ्यास, “भारत को भारत ही कहें” का संकल्प तथा स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देने जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। इन सभी गतिविधियों में विद्यार्थी उत्साहपूर्वक सहभागिता कर रहे हैं।

वयम् गुरुकुलम का यह प्रयास शिक्षा को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखते हुए उसे जीवन-कौशल, संस्कार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल है।

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