झाबुआ। शासकीय कन्या महाविद्यालय, झाबुआ में हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों का गरिमामय समापन समारोह संपन्न हुआ। पखवाड़े के दौरान छात्राओं ने विभिन्न साहित्यिक एवं रचनात्मक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा हिंदी भाषा के प्रति अपने प्रेम, सम्मान और रचनात्मक अभिव्यक्ति का परिचय दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन-वंदन एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अंजना सोलंकी ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा, संवेदना और राष्ट्रीय चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति है। हिंदी साहित्य की धारा अत्यंत समृद्ध और व्यापक रही है, जिसने समाज, संस्कृति और जीवन के विविध पक्षों को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रदान की है। हिंदी साहित्य की परंपरा में भक्ति, रीति, आधुनिक तथा समकालीन साहित्य की विभिन्न धाराओं ने भाषा को निरंतर समृद्ध किया है।
उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य की शक्ति केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकजीवन, लोकभाषाओं, लोकपरंपराओं और जनमानस से भी गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने छात्राओं से हिंदी को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञान, संवाद और सृजन की भाषा के रूप में अपनाने का आह्वान किया।
हिंदी पखवाड़े के दौरान छात्राओं के लिए अनेक साहित्यिक, भाषायी एवं रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में हिंदी भाषा एवं साहित्य की भूमिका’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता, साहित्यकारों पर केंद्रित व्याख्यान, निबंध लेखन, वाद-विवाद, कविता पाठ, कहानी लेखन, आशु भाषण, हिंदी साहित्य एवं व्याकरण पर आधारित प्रश्नोत्तरी, सामान्य ज्ञान तथा अनुवाद प्रतियोगिता आदि प्रमुख रहे। इन गतिविधियों के माध्यम से छात्राओं को हिंदी भाषा एवं साहित्य के विभिन्न आयामों से परिचित कराने के साथ उनकी सृजनात्मक एवं अभिव्यक्ति क्षमता को विकसित करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. विजयकुमार द्वारा किया गया। उन्होंने हिंदी भाषा एवं साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा हमारी पहचान और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रीति समदरिया त्रिपाठी ने आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं छात्राओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं। हिंदी पखवाड़े के समापन अवसर पर पूरे महाविद्यालय में हिंदी भाषा, साहित्य और भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव एवं उत्साह का वातावरण रहा।
