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*शारदा विद्या मंदिर, बिलीडोज (झाबुआ) में 'वृहद कन्या पूजन एवं कन्या भोज' की तैयारियां अंतिम चरण में, 'वोकल फॉर लोकल' की थीम पर 350 कन्याओं का होगा पूजन*

राजेंद्र राठौर
झाबुआ। स्थानीय शारदा विद्या मंदिर, बिलीडोज, झाबुआ में कल, दिनांक 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को प्रातः 10.30 बजे आयोजित होने वाले वृहद कन्या पूजन और भोज की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। इस बार का यह आयोजन बेहद भव्य और अनूठा है, क्योंकि इसमें लगभग 350 कन्याओं की गरिमामयी उपस्थिति होगी, जिनका पूर्ण विधि-विधान से पूजन कर उन्हें भोज कराया जाएगा। इस पूरे आयोजन की कमान और व्यवस्था स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा स्वयं संभाली जा रही है।
  *वोकल फॉर लोकल' की जीवंत मिसाल, पर्यावरण संरक्षण का संकल्प* 
प्रधानमंत्री के 'वोकल फॉर लोकल' और आत्मनिर्भर भारत के आह्वान से प्रेरणा लेते हुए, इस आयोजन को पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) बनाया जा रहा है। विद्यालय के विद्यार्थियों ने प्राचीन भारतीय परंपराओं को पुनर्जीवित करते हुए खुद अपने हाथों से पलाश के पत्तों से पत्तलें और दोने तैयार किए हैं। कन्या भोज के दौरान इन्हीं प्राकृतिक पत्तलों पर भोजन परोसा जाएगा, जो प्लास्टिक और थर्माकोल के पूर्ण बहिष्कार का एक बड़ा संदेश है। 
 *प्राकृतिक और हस्तनिर्मित कलाकृतियों से सजेगा पंडाल*
इसके साथ ही, आयोजन स्थल की साज-सज्जा के लिए भी बाजार से मिलने वाले प्लास्टिक के रेडीमेड उत्पादों का पूर्णतः बहिष्कार किया गया है। विद्यार्थियों द्वारा कागज से बनाए गए सुंदर रंगीन फूलों, आम एवं चंपा के पत्तों (तोरण) तथा गेंदे के असली फूलों से पूरे परिसर को सजाया जा रहा है। बच्चों की इस कलात्मकता, स्वदेशी उत्पादों के प्रति प्रेम और पर्यावरण के प्रति उनकी इस अनूठी सोच की हर तरफ सराहना हो रही है।

 *विद्यार्थियों के कंधों पर पूरे आयोजन की जिम्मेदारी*
* इस वृहद आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से 'विद्यार्थियों द्वारा' ही संचालित और प्रबंधित है। साज-सज्जा, 350 कन्याओं के स्वागत, पूजन सामग्री की व्यवस्था से लेकर भोजन वितरण और अतिथियों के प्रबंधन तक, हर एक विभाग की जिम्मेदारी अलग-अलग छात्र समितियों (Student Committees) को सौंपी गई है। इससे बच्चों में टीम वर्क, नेतृत्व क्षमता और सनातन संस्कृति के प्रति आदर की भावना विकसित हो रही है।  *संस्था संचालक ओम शर्मा* ने तैयारियों का जायजा लेते हुए कहा, "हमारा उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों को अपनी संस्कृति, पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना है। पलाश के पत्तों से पत्तलें तैयार करना और प्लास्टिक-मुक्त आयोजन करना इस बात का प्रमाण है कि हमारे बच्चे पर्यावरण के प्रति कितने सजग हैं। इतनी बड़ी संख्या में कन्याओं का पूजन और इस पूरे उत्सव का प्रबंधन बच्चों द्वारा किया जाना उनके भीतर आत्मनिर्भरता और नेतृत्व के गुणों को निखारेगा।"

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