झाबुआ। शासकीय कन्या महाविद्यालय, झाबुआ में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई, रेड रिबन क्लब एवं जिला चिकित्सालय के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य विषय पर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन प्राचार्य डॉ. अंजना सोलंकी के निर्देशन एवं कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रीति एस. त्रिपाठी के मार्गदर्शन में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदना के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन में डॉ. प्रीति एस. त्रिपाठी ने कहा कि स्वस्थ एवं सफल जीवन के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य का संतुलित होना भी अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान समय में तनाव, प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक एवं सामाजिक दबाव के कारण युवा मानसिक अवसाद का शिकार हो रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में घबराने के बजाय सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास करना चाहिए।
मुख्य वक्ता डॉ. विजन बारिया, मेडिकल ऑफिसर, जिला चिकित्सालय झाबुआ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार शारीरिक बीमारी होने पर चिकित्सकीय उपचार लिया जाता है, उसी प्रकार मानसिक तनाव, चिंता अथवा अवसाद की स्थिति में विशेषज्ञ से परामर्श लेने में किसी प्रकार की झिझक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने छात्राओं से अपनी समस्याएँ माता-पिता, शिक्षकों एवं विश्वसनीय मित्रों के साथ साझा करने तथा समय रहते सहायता लेने का आग्रह किया।
काउंसलर दिलीप परिहार ने संवादात्मक शैली में मानसिक स्वास्थ्य, तनाव एवं अवसाद के कारणों पर प्रकाश डालते हुए प्रश्नोत्तरी के माध्यम से छात्राओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, अकेलापन तथा नशे की प्रवृत्ति युवाओं को मानसिक रूप से कमजोर बना सकती है। इसलिए डिजिटल संतुलन, सकारात्मक दिनचर्या और आत्मसंवाद को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
ललिता मोरी ने अवसाद के लक्षणों की जानकारी देते हुए अपने अनुभव साझा किए तथा छात्राओं को किसी भी प्रकार के शोषण, मानसिक दबाव अथवा उत्पीड़न की स्थिति में चुप न रहने और समय पर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया। शर्मीला सस्तिया ने नशे को मानसिक एवं सामाजिक पतन का प्रमुख कारण बताते हुए नशामुक्त जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. अंजना सोलंकी ने कहा कि माता-पिता बच्चों के सबसे बड़े मार्गदर्शक और सच्चे मित्र होते हैं। जीवन में आने वाली चुनौतियों से घबराने के बजाय उनका साहसपूर्वक सामना करना चाहिए। उन्होंने छात्राओं से मोबाइल का संयमित उपयोग करने, सकारात्मक सोच विकसित करने तथा किसी भी परिस्थिति में आत्मविश्वास बनाए रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. प्रीति एस. त्रिपाठी ने किया तथा आभार प्रदर्शन प्रो. विजय कुमार ने व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. विद्या चौहान, प्रो. सुरेश भूरिया, प्रो. ज्योति भावर सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं। कार्यशाला ने छात्राओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, तनावमुक्त जीवनशैली अपनाने तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों से परामर्श लेने की सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
