झाबुआ। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चेतना जगाकर उन्हें व्यावहारिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसी अनुकरणीय सोच को धरातल पर उतारते हुए स्थानीय शारदा विद्या मंदिर बिलिडोज, झाबुआ में नवरात्रि के पावन पर्व पर एक ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुआ।
विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों के मार्गदर्शन में भव्य कन्या पूजन एवं कन्या भोज का आयोजन किया। गरिमामय आयोजन में शारदा समूह के युवा संचालक अथर्व शर्मा, खुशी शर्मा एवम् मुख्य अतिथि मुकेश जैन( राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद) ,मनोहर सिंह राठौड़ (राजपूत समाज संरक्षक) एवं राकेश परमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत ओम शर्मा और मनोज शर्मा ने किया। अतिथियों ने देवी स्वरूपा नौ कन्याओं का आदर सत्कार के साथ पूजन किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में बच्चों के हुनर, प्रबंधन क्षमता और आत्मनिर्भर सोच की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
*विद्यार्थियों ने निभाई मुख्य भूमिका:* पूरी मर्यादा और श्रद्धा से किया कन्या पूजन व उपहार वितरण
इस आयोजन की सबसे सुंदर विशेषता यह रही कि पूजन से लेकर उपहार वितरण तक की पूरी कमान विद्यार्थियों के हाथों में थी। छात्र-छात्राओं ने स्वयं मुख्य द्वार पर कन्याओं का आत्मीय स्वागत किया एवं स्वयं द्वारा निर्मित कागज के फूल दिए। विद्यार्थियों ने पूरी धार्मिक मर्यादा और वैदिक रीति-रिवाज के साथ बाल-कन्याओं के चरण पखारे, उन्हें कुमकुम-अक्षत का तिलक लगाया, कलावा बांधा और धूप-दीप से आरती उतारी।
इसके बाद सभी कन्याओं को आदर सहित आसन पर बिठाकर पूरी श्रद्धा के साथ भोजन प्रसादी परोसी गई। भोजन के उपरांत विद्यार्थियों ने अपने पॉकेट मनी और स्वेच्छा से एकत्रित की गई राशि से सभी कन्याओं को उनकी उपयोगिता और पसंद के सुंदर उपहार व शिक्षण सामग्रियां भेंट कीं। उपहार पाकर बाल-कन्याओं के चेहरे खिल उठे। विद्यार्थियों द्वारा किया गया यह अनुशासित, मर्यादित पूजन और स्नेहपूर्वक उपहार देना वहां उपस्थित सभी अतिथियों के दिलों को छू गया।
*नारी सशक्तिकरण और स्वावलंबन का अद्भुत संगम*
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि यह नारी सशक्तिकरण (Women Empowerment) और "शिक्षा से आत्मनिर्भर भारत" के संकल्प का एक जीवंत प्रतीक बन गया। बालिकाओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन करना और उन्हें सम्मान देना समाज में महिलाओं के प्रति सुरक्षा, सम्मान और समानता की भावना को सुदृढ़ करने का एक सशक्त संदेश था।
वहीं दूसरी ओर, देश के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वोकल फॉर लोकल' के सपने को साकार करते हुए विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल पेश की। आधुनिकता की होड़ में जहां प्लास्टिक और केमिकल युक्त डिस्पोजेबल बर्तनों का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है, वहीं इस विद्यालय के बच्चों ने प्रकृति की ओर लौटने का शंखनाद किया। विद्यार्थियों ने स्वयं विद्यालय परिसर से पलाश के पत्तों को एकत्रित किया और अपने हाथों से सुंदर, पारंपरिक दोने और पत्तल तैयार किए। इन्हीं हस्तनिर्मित पत्तलों में कन्याओं को भोजन कराया गया। बेकार समझे जाने वाले पत्तों से उपयोगी पत्तल बनाने का यह नवाचार पूरी तरह से 'वेस्ट से बेस्ट' (Waste to Best) की थीम पर आधारित था, जो यह सिखाता है कि शिक्षा कैसे बच्चों को हुनरमंद और स्वावलंबी बना सकती है।
*नारों की गूंज: स्लोगन से दिया समाज को जागृति का संदेश*
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की रचनात्मकता उनके द्वारा लिखे गए स्लोगन (नारों) में साफ झलक रही थी। कन्या शक्ति, आत्मनिर्भरता और प्रकृति संरक्षण को जोड़ते हुए विद्यार्थियों ने इन पंक्तियों के माध्यम से समाज को एक नई दिशा दिखाने का प्रयास किया:
* *"शिक्षा से सजेंगे संस्कार हमारे, आत्मनिर्भर भारत के बनेंगे सितारे।"
* "नारी का सम्मान जहां है, संस्कृति का उत्थान वहां है।"
* "पलाश के पत्तों ने दिखाई राह, प्लास्टिक मुक्त हो हमारी चाह।"
* "कन्या पूजन से संस्कारों का विस्तार, नारी सशक्तिकरण से देश का आधार।"
* "हाथों में हुनर और मन में विश्वास, 'वेस्ट से बेस्ट' कर रचेंगे नया इतिहास।"
* "अपनी संस्कृति को अपनाएंगे, आत्मनिर्भर भारत का सपना सच कर दिखाएंगे।"
कार्यक्रम के सफल समापन पर संस्था की संचालिका किरण शर्मा ने मंच से विद्यार्थियों की पीठ थपथपाई
* श्रीमती किरण शर्मा ने अपने उद्बोधन में संस्कार,सेवा, स्वावलंबन और नारी शक्ति पर जोर देते हुए कहा, "आज का यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि हमारी शिक्षा प्रणाली बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने के संस्कार दे रही है। पलाश के पत्तों से दोने-पत्तल बनाना यह दर्शाता है कि हमारे ग्रामीण अंचल में संसाधनों की कमी नहीं है, बस सही दृष्टि की आवश्यकता है। कन्या पूजन और उन्हें उपहार भेंट करने के माध्यम से बच्चों ने समाज को संदेश दिया है कि नारी शक्ति का सम्मान ही एक उन्नत समाज की पहचान है। सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर भारत तभी बनेगा जब हमारी बेटियां सशक्त होंगी और हमारी युवा पीढ़ी प्रकृति के साथ जुड़ेगी।"
* ओम शर्मा ने अपने उद्बोधन में वेस्ट से बेस्ट' और शिक्षा के अंतर्संबंधों पर बात करते हुए कहा, "जब शिक्षा श्रम के प्रति सम्मान (Dignity of Labor) सिखाती है, तभी एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता से पलाश के पत्तों को एक उत्कृष्ट स्वरूप दिया है। यह आयोजन बच्चों में टीम वर्क, नेतृत्व क्षमता, उद्यमिता की शुरुआती समझ और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना को विकसित करने का एक सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है। यह पूरे झाबुआ जिले के लिए एक अनुकरणीय मॉडल है।"
पूरा आयोजन विद्यार्थियों और शिक्षकों के बेहतरीन तालमेल, अद्वितीय अनुशासन और रचनात्मक ऊर्जा के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक विद्यालय का कार्यक्रम न रहकर सामाजिक सुधार, नारी सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता का एक जीवंत महा-अभियान बन गया, जिसकी पूरे क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।
कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर कंचन चौहान ने किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में शारदा विद्या मंदिर बिलिडोज से वरिष्ठ शिक्षाविद राकेश शाह उप प्राचार्य देवेंद्र व्यास ,सतीश लाखेरी ,अंकित वैरागी,संगीता बामनिया, अर्पिता बारिया ,लीना डोडियार ,शारदा विद्या मंदिर (शाखा )गोपाल कॉलोनी से रितेश शर्मा ,भारती भाटी वयं गुरुकुलम से प्राचार्य दीपशिखा तिवारी उप प्राचार्य मकरंद आचार्य के साथ सभी संस्थाओं के स्टाफ का विशेष सहयोग रहा।
