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*झाबुआ श्री संघ के प्रेरणा पूंज साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्री जी की पांचवीं पुण्यतिथि पर हुआ गुणानुवाद सभा का हुआ आयोजन*

राजेंद्र राठौर
*संयम साधना में सुमेरु शिखर समान थी साध्वी श्री पुतिनप्रज्ञा श्री जी* 
*पुज्य पुतिनप्रज्ञा श्री जी श्रमणी समुदाय में मुकुट मणि के समान थी - साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी*
झाबुआ - शासनपति श्री महावीर स्वामी के वात्सल्यमय जिनशासन में, श्रीमद् विजय राजेन्द्रसूरीजी के दिव्य उपवन में, श्रीमद् विजय हेमेन्द्रसूरीजी से दीक्षित एवं आचार्य श्रीमद् विजय जयानंदसूरीजी की आज्ञानुवर्तिनी परम विदुषी साध्वी श्री मणीप्रभाश्रीजी की प्रथम विनयवंत, आत्मार्थी एवं सुविशुद्ध चारित्र पालक साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्री जी की पंचमी पुण्य तिथि पर झाबुआ जैन श्री संघ द्वारा गुणानुवाद सभा का आयोजन पूज्य साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा 7 की पावन निश्रा में किया गया इस अवसर पर सामूहिक सामायिक का भी आयोजन किया गया कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे। 
श्री संघ के रिंकू रूनवाल ने बताया कि झाबुआ जैन संघ की परम उपकारी साध्वी श्री पुनीतप्रज्ञा श्री जी की पुण्य स्मृति पर आयोजित गुणानुवाद सभा में पूज्य साध्वी जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए विदुषी साध्वी श्रीअविचलदृष्टा श्री जी म.सा.ने कहा कि उनका अपनी गुरुणी साध्वी श्री मणीप्रभाश्रीजी के प्रति प्रशस्त राग देखते ही बनता था। “गुरुमैया... गुरुमैया...” कहते हुए आपके हावभाव में गुरु-भक्ति एवं स्वामिभक्ति की विशिष्ट झलक दिखाई देती थी। संयम साधना में सुमेरु समान साध्वी श्री श्रमणी समुदाय में "मुकुट-मणि" के समान थी, उनकी उत्कृष्ट चारित्र क्रिया देखते ही बनती थी वे गुणानुरागी थीं। बाल से वृद्ध, जैन से जैनेत्तर सभी के प्रति आपकी मैत्री भावना एवं वात्सल्य धारा सदैव प्रवाहित रहती थी 
 श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता ने गुणानुवाद करतें हुए कहा कि आपके सान्निध्य में झाबुआ में सन् 2008 एवं सन् 2018 के दो यशस्वी चातुर्मास सम्पन्न हुए ,आपकी चारित्र के प्रति चुस्तता, अरिहंत प्रभु पर असीम श्रद्धा और “सीमंधर स्वामी के पास हमें जाना है” जैसे भावपूर्ण उद्गार आज भी बाल से वृद्ध तक सभी में भक्ति का वेग उत्पन्न करते हैं।
 गुणानुवाद सभा में पूज्य साध्वी जी के बारे मे श्रीमति प्रभा मुथा ने कहा कि “सर्वे जीवो मोक्षे जाओ... अणु-परमाणु शिव बनी जाओ...”आपका यह मंगलभाव आज भी स्मरणीय है।आपके प्रेरणादायी उद्बोधनों को श्रवण कर झाबुआ के अनेक श्रावक-श्राविकाए प्रतिबोधित हुए और जीवनपर्यंत नियमों से सज्जित हुए। आज भी वे नियम उसी श्रद्धा से अस्खलित रूप से पल रहे हैं।
साध्वी जी के गुणानुवाद करते हुए यशवंत भण्डारी ने कहा की पूज्य साध्वी जी ने झाबुआ श्रीसंघ पर अनेकानेक उपकार किए हैं, निश्चित रूप से आपका पावन जीवन श्री सीमंधर स्वामी के सान्निध्य में संयम प्राप्त करने की मंगल भावना से ओतप्रोत रहा। झाबुआ श्रीसंघ में आपने धर्मरूपी अमृत-अनुष्ठानों का जो बीजारोपण किया था, वह आज वटवृक्ष बनकर जिनशासन की शोभा बढ़ा रहा है।
*सामूहिक सामायिक एवं आयम्बिल तप का हुआ आयोजन*
पूज्य साध्वी जी के पुण्य स्मृति पर बावन जिनालय पर सामूहिक सामायिक एवं आयम्बिल तप का आयोजन  किया गया जिसमें समाजजनों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

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