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*भारतीय शिक्षा दिवस पर भारतीय शिक्षा के पुनर्जागरण का हुआ आह्वान*

राजेंद्र राठौर

*भारतीय शिक्षा ही चरित्र, संस्कार और राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार : ओमप्रकाश शर्मा*
झाबुआ। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के स्थापना दिवस को *"भारतीय शिक्षा दिवस"* के रूप में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं संदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय परिसर में अत्यंत गरिमामय एवं प्रेरणादायी वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नगर के शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यालय एवं महाविद्यालयों के प्राचार्यों, प्राध्यापकों, शिक्षकों, न्यास के पदाधिकारियों, विद्यार्थियों तथा शिक्षा जगत से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुरूप मंगलाचरण के साथ हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य हरीश कुंडल ने की। मुख्य वक्ता के रूप में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सह-संयोजक  ओमप्रकाश शर्मा उपस्थित रहे। वहीं विशेष अतिथि के रूप में नगर संघ चालक  प्रेमअदीप सिंह पवार एवं अन्य गणमान्य अतिथि मंचासीन रहे।
प्रारंभ में विद्यालय के प्राचार्य हरीश कुंडल ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का आत्मीय स्वागत किया तथा भारतीय शिक्षा दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात योगेश्वर कहार ने मंचासीन अतिथियों का परिचय कराया।
इसके उपरांत विद्यालय शिक्षा की सह-संयोजिका श्रीमती अंबिका टवली ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास का विस्तृत परिचय देते हुए न्यास द्वारा भारतीय शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा, संस्कार आधारित शिक्षा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु किए जा रहे विभिन्न आयामों एवं सतत प्रयासों की जानकारी दी।
मुख्य वक्ता ओमप्रकाश शर्मा ने अपने प्रेरक एवं ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि भारतीय शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, संस्कार निर्माण और राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा व्यवस्था विश्व के लिए आदर्श रही है तथा आज आवश्यकता है कि शिक्षा को पुनः भारतीय दृष्टि, भारतीय जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ा जाए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना को समाज के प्रत्येक विद्यालय तक पहुँचाने का आह्वान किया तथा विद्यार्थियों में भारतीयता, आत्मविश्वास और स्वावलंबन विकसित करने पर बल दिया।
इस अवसर पर ओम शर्मा की ओर से विद्यार्थियों के प्रेरणास्रोत महापुरुषों के जीवन एवं उनके आदर्शों से परिचित कराने हेतु विभिन्न महापुरुषों के जीवन परिचय से संबंधित पुस्तकों का भेंट स्वरूप वितरण भी किया गया।
कार्यक्रम के अंत में अनिल कोठारी ने सभी अतिथियों, आयोजकों एवं उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
पूरे कार्यक्रम का  संचालन  मकरंद आचार्य ने किया।
कार्यक्रम में कन्या महाविद्यालय झाबुआ की प्राचार्य श्रीमती अंजना मुवेल, भारतीय ज्ञान परंपरा के संयोजक विजय  ग्रेवाल , पर्यावरण प्रांत संयोजक राजकुमार देवल, जिला संयोजक सोहन डॉवेल सहित  अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता, विद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षकगण, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
भारतीय शिक्षा दिवस के इस आयोजन ने उपस्थित सभी शिक्षाविदों एवं विद्यार्थियों में भारतीय शिक्षा के प्रति गौरव, आत्मविश्वास एवं राष्ट्र निर्माण के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ किया।

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