“जिसके जीवन में तप होता है, उसका कभी पतन नहीं होता” — पूज्य साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी
झाबुआ। स्थानीय जैन श्वेताम्बर तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय पर चातुर्मास के अंतर्गत पर्युषण पर्व की आराधनाओं के पश्चात भी तप-जप एवं धार्मिक आराधनाओं का क्रम निरंतर जारी है। इसी क्रम में चार तपस्वियों की तपस्या पूर्णाहुति के अवसर पर उनके निवास स्थान से श्री ऋषभदेव बावन जिनालय तक भक्ति एवं उल्लासपूर्ण शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए तथा तपस्वियों के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस अवसर पर श्री संघ एवं चातुर्मास समिति द्वारा सभी तपस्वियों का बहुमान किया गया।
श्री संघ के रिंकू रूनवाल ने बताया कि पुण्य सम्राट श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वर जी महाराज साहेब के पट्टधर, गच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वर जी म.सा. एवं आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय जयरत्न सूरीश्वर जी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी, साध्वी श्री शशिकलाश्री जी म.सा. की सुशिष्या विदुषी साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी म.सा. आदि ठाणा-7 की पावनकारी प्रेरणा एवं निश्रा में तप आराधनाएं संपन्न हुईं।
तपस्वी दंपत्ति गौरव छाजेड एवं श्रीमती राशि गौरव छाजेड ने 11 उपवास की तपस्या पूर्ण की। वहीं छोटी उम्र में कु. दृष्टी राहुल संघवी ने 13 उपवास तथा कु. प्रियंका योगेश नाहर ने 11 उपवास की तपस्या पूर्ण कर धर्म आराधना का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
चारों तपस्वी अपने-अपने निवास स्थान से शोभायात्रा के रूप में बावन जिनालय पहुंचे। मार्ग में समाजजनों द्वारा तपस्वियों का अभिनंदन किया गया तथा उनके जयकारों से वातावरण गूंजायमान रहा। जिनालय पहुंचकर चारों तपस्वियों एवं उनके परिवारजनों ने प्रभु के दर्शन-वंदन कर शासन माता की पूजा-अर्चना की।
तप-जप एवं क्रिया का त्रिवेणी संगम मोक्षमार्ग की ओर ले जाता है
तप अनुमोदनार्थ बावन जिनालय उपाश्रय में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी महाराज साहेब ने कहा कि प्रबल पुण्योदय से हमें मानव जीवन प्राप्त हुआ है। इस दुर्लभ मानव जीवन को तप, जप एवं आराधना के माध्यम से सार्थक किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि “जिसके जीवन में तप होता है, उसका कभी पतन नहीं होता।” निकाचित कर्मों के क्षय के लिए उत्कृष्ट तप आवश्यक है, लेकिन केवल तप ही पर्याप्त नहीं है। तप के साथ जप एवं क्रिया का भी समन्वय होना चाहिए। जब तप, जप और क्रिया का त्रिवेणी संगम जीवन में होता है, तब जीव मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होता है।
पूज्य साध्वी श्री ने कहा कि आज छोटी उम्र के बच्चों सहित तपस्वी दंपत्ति ने जिस उत्कृष्ट तप आराधना को पूर्ण किया है, वह वास्तव में अत्यंत सराहनीय एवं अनुमोदनीय है। इनकी तपस्या समाज के अन्य श्रद्धालुओं के लिए भी प्रेरणादायी है।
तपस्वियों का किया बहुमान
तप आराधना की पूर्णाहुति के अवसर पर तपस्वी दंपत्ति श्री गौरव छाजेड एवं श्रीमती राशि छाजेड, कु. दृष्टी संघवी एवं कु. प्रियंका नाहर का श्री संघ एवं चातुर्मास समिति की ओर से बहुमान किया गया।
बहुमान के लाभार्थी मधुकर जी, निशान एवं राश्व शाह तथा श्रीमती नीता शाह, पूजा एवं धर्मी शाह द्वारा तपस्वियों का शाल, श्रीफल एवं तिलक से सम्मान किया गया।
इस अवसर पर छाजेड परिवार, संघवी परिवार एवं नाहर परिवार की ओर से संघपूजा का लाभ भी लिया गया।
कार्यक्रम के पश्चात सभी तपस्वियों ने विधिपूर्वक पारणा किया। संपूर्ण आयोजन में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे तथा सभी ने तपस्वियों की आराधना की अनुमोदना करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की।
