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श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर में श्री हरी-हर कथा एवं श्री कृष्ण बालरूप लीलाओं का भव्य आयोजन

राजेंद्र राठौर
झाबुआ। श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर, कैलाश मार्ग पर स्थित पवित्र स्थल में  श्री हरी-हर कथा का भगवद् श्रृंखलाबद्ध आयोजन संपन्न हुआ। 
   प्रदेश-स्तर पर विख्यात पण्डित श्री कैलाश जी त्रिपाठी के मुखारबिंद से चल रही इस दिव्य कथा श्रृंखला के अंतर्गत कल 8/8/2026 को श्री कृष्ण के बालरूप की लीलाओं का सुन्दर व मार्मिक वाचन प्रस्तुत किया गया। पवित्र कथा से सैकड़ों भक्ति-जन प्रेरणा और आध्यात्मिक आलोक से संपृक्त हुए।

कथा-व्याख्याता एवं विशिष्ट सम्मान
    इस पावन अवसर पर मुख्य कथा वाचनकर्ता पण्डित श्री कैलाश जी त्रिपाठी ने श्रीकृष्ण के बाल्यकाल की दिव्य लीलाओं का जीवंत एवं शास्त्रीय वर्णन किया। उनकी वाणी से श्रोतागण भाव-भ्रमरित होकर भक्ति रस में नहा उठे।
कथा के पश्चात् नगर के अनेक धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों ने पण्डित जी तथा मंदिर समिति के सदस्यों का आदर-सत्कार कर उन्हें सम्मानित किया। झाबुआ जिला फोटोग्राफर एसोसिएशन के सदस्यों का एक प्रतिनिधि दल भी मंदिर पहुँचा और पण्डित जी व समिति को पुष्पगुच्छ व स्मृति-चिन्ह अर्पित कर सहयोग एवं श्रद्धा व्यक्त की।

बालरूप झाकियाँ एवं भजन-संगीत
  स्पेशल आयोजन के रूप में श्री कृष्ण के बाल-रूप की सुन्दर झाकियों का आह्लाददायी प्रदर्शनी भी सजाई गई, जिनमें बाल-गोपाल के माखन चुराने, मुरली वादन तथा यशोदा मैया के मधुर सान्निध्य को कलात्मक रूप से दर्शाया गया।
    झाकियों के साथ भक्तजन प्रसिद्ध गायक जगदीश पवांर ओर उनकी संगीत पार्टी के भजन-कीर्तन में भी सम्मिलित हुए, जिससे संपूर्ण मन्दिर परिसर अध्यात्मिक वातावरण से गुंजायमान रहा।
    मंदिर समिति की भूमिका एवं आभार
श्री मनकामेश्वर महादेव मन्दिर समिति द्वारा इस शुभ प्रसंग का पूर्ण सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संयोजन किया गया। समिति ने पंडितजी के मार्गदर्शन, झाकियों की व्यवस्था, भजन-समूह एवं अरती की शोभा हेतु समुचित प्रबंध सुनिश्चित किए।
समिति ने सभी आगन्तुकों, धार्मिक-सामाजिक संघठनों तथा झाबुआ जिला फोटोग्राफर एसोसिएशन का आभार व्यक्त किया, जिनके सत्कार और सहयोग से यह आयोजन सफल एवं स्फुट रहा।
भक्ति-जीवन पर प्रभाव
इस आध्यात्मिक संध्या से नगर में व्यापक धर्म-प्रवृत्ति उत्पन्न हुई। श्रद्धालुओं ने कहा कि कथा के शब्दों ने हृदय को शुद्ध किया तथा जीवन-मार्ग में उन्नति के प्रेरक विचार दिए। मंदिर के चारों ओर भक्तिमय माहौल बना रहा एवं अनेक परिवारों ने पुनः मंदिर में आने व सेवा-कार्य में भागीदारी करने का संकल्प लिया।

"मधुबन बिताये रास रंग, मुरली की तान सुनो प्यारे; यशोदा के कान्हा बोले, चलो खेलें दिन पुरे तुम्हारे।"
या शास्त्रीय श्लोक विकल्प:
"पिङ्गल कुटिल वेगः पद्मपद्मे किशोरः, नन्दनन्दनं ददर्शुर्वन्द्यो बालो मुरारीः।"

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