समस्या नहीं, समाधान का हिस्सा बनें : ओम प्रकाश शर्मा
भारतीय शिक्षा दिवस पर शासकीय कन्या महाविद्यालय में प्रेरक व्याख्यानमाला आयोजित
झाबुआ। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय शिक्षा दिवस के रूप में शासकीय कन्या महाविद्यालय, झाबुआ की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के तत्वावधान में एक दिवसीय प्रेरक व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अंजना सोलंकी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सह-संयोजक श्री ओम प्रकाश शर्मा उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में प्रांत विद्यालयीन सह-संयोजक श्रीमती अंबिका टबली, अग्रणी महाविद्यालय झाबुआ के एनसीसी अधिकारी डॉ. गोपाल भूरिया तथा स्वामी विवेकानंद करियर प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ. अनंत सिंह उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन के पश्चात श्रीमती अंबिका टबली ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की स्थापना, उद्देश्य एवं विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देते हुए भारतीय शिक्षा की गौरवशाली परंपरा पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता श्री ओम प्रकाश शर्मा ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में केवल समस्याओं की चर्चा करने के बजाय उनके समाधान का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने महिलाओं एवं बालिकाओं के सर्वांगीण सशक्तीकरण को विकसित भारत की आधारशिला बताते हुए छात्राओं से आत्मविश्वास, संस्कार और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रीति एस. त्रिपाठी ने भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए छात्राओं से अपने जन्मदिवस का शुभारंभ भारतीय परंपरा के अनुसार सूर्योदय के साथ करने तथा जीवन में भारतीय संस्कारों को अपनाने का आग्रह किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. अंजना सोलंकी ने कहा कि महिला परिवार, समाज और राष्ट्र की धुरी है। यदि महिलाएँ तन, मन और धन से सशक्त होंगी तो एक सशक्त समाज और विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव होगा।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. प्रीति एस. त्रिपाठी ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. मुकेश अजनार ने किया। इस अवसर पर प्रो. विजय कुमार, प्रो. सुरेश भूरिया, प्रो. ज्योति भावर, डॉ. वंदना मंडलोई, डॉ. राजेश भावर सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं।